नंबर 1 कलमा अल्लाह एक है और मोहम्मद साहब उनके पैगंबर हैं नंबर दो नमाज प्रतिदिन पांच बार नमाज पढ़ना रमजान रमजान के पवित्र महीने में रोजा यानी कि व्रत रखना जाकर नंबर 3 जाकर अपनी उपार्जित आय का 2.5 प्रतिशत गरीबों को सहायता देना और नंबर 5 हज पूरे जीवन में एक बार मक्का की तीर्थ यात्रा करना मोहम्मद साहब की विशेषताएं यहीं से आएं हैं जो इस्लाम धर्म को शुरूआत करते हैं इस्लाम धर्म एक धर्म है यह अरब देश की बात है कि वहां के मक्का नामक शहर में सन 750 में हजरत मोहम्मद का जन्म हुआ था उस समय अरब के छोटे-छोटे कबीले थे जो लगातार एक-दूसरे से लड़ते रहते थे यह लोग बहुत सारे देवी देवताओं की पूजा करते थे हजरत मोहम्मद इन कमीनों के बीच आपसी सौदा एवं भाईचारा बढ़ाने के लिए संदेश लेने लगे कि ईश्वर एक है एक अल्लाह एकमात्र अल्लाह है सीधा और सरल तरीके से प्रार्थना करनी चाहिए मोहम्मद साहब ने कहा कि अल्लाह को मानने वाले लोग बराबर हैं और एक हैं शुरू में मक्का शहर के कई लोग ने मोहम्मद साहब की बातों का विरोध भी किया यहां तक कि मोहम्मद साहब को मक्का छोड़कर 622 ईस्वी में दूसरे शहर मदीना जाना पड़ा इनका यह जाना हिजरत कहा जाता है इसी समय से मुसलमानों को हिजरी संवत प्रारंभ होता है धीरे-धीरे अरब के सारे कबीले मोहम्मद साहब की बातें मानने लगे इस्लाम धर्म अरब देश से शुरू होकर दुनिया के कई देशों में बहुत से लोगों ने इस्लाम धर्म को अपनाया
मोहम्मद साहब की विशेषताएं एवं शिक्षाएं Edit
नंबर 1 कलमा अल्लाह एक है और मोहम्मद साहब उनके पैगंबर हैं नंबर दो नमाज प्रतिदिन पांच बार नमाज पढ़ना रमजान रमजान के पवित्र महीने में रोजा यानी कि व्रत रखना जाकर नंबर 3 जाकर अपनी उपार्जित आय का 2.5 प्रतिशत गरीबों को सहायता देना और नंबर 5 हज पूरे जीवन में एक बार मक्का की तीर्थ यात्रा करना मोहम्मद साहब की विशेषताएं यहीं से आएं हैं जो इस्लाम धर्म को शुरूआत करते हैं इस्लाम धर्म एक धर्म है यह अरब देश की बात है कि वहां के मक्का नामक शहर में सन 750 में हजरत मोहम्मद का जन्म हुआ था उस समय अरब के छोटे-छोटे कबीले थे जो लगातार एक-दूसरे से लड़ते रहते थे यह लोग बहुत सारे देवी देवताओं की पूजा करते थे हजरत मोहम्मद इन कमीनों के बीच आपसी सौदा एवं भाईचारा बढ़ाने के लिए संदेश लेने लगे कि ईश्वर एक है एक अल्लाह एकमात्र अल्लाह है सीधा और सरल तरीके से प्रार्थना करनी चाहिए मोहम्मद साहब ने कहा कि अल्लाह को मानने वाले लोग बराबर हैं और एक हैं शुरू में मक्का शहर के कई लोग ने मोहम्मद साहब की बातों का विरोध भी किया यहां तक कि मोहम्मद साहब को मक्का छोड़कर 622 ईस्वी में दूसरे शहर मदीना जाना पड़ा इनका यह जाना हिजरत कहा जाता है इसी समय से मुसलमानों को हिजरी संवत प्रारंभ होता है धीरे-धीरे अरब के सारे कबीले मोहम्मद साहब की बातें मानने लगे इस्लाम धर्म अरब देश से शुरू होकर दुनिया के कई देशों में बहुत से लोगों ने इस्लाम धर्म को अपनाया
