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अलबरूनी की दृष्टि में भारत     Edit

अलबरूनी की दृष्टि में भारत मध्य एशिया का प्रसिद्ध विद्वान अब रहन जिसे हम अलबरूनी के नाम से भी जानते हैं महमूद गजनवी के साथ भारत आया था उसने अपनी पुस्तक तहक़ीक़ ए हिंद में 11 वीं शताब्दी में भारत के सामाजिक एवं सांस्कृतिक जीवन से सामाजिक रीति रिवाज तौर-तरीके धर्म अंधविश्वास पर विस्तार से जानकारी दी है जिस के प्रमुख अंश निम्नलिखित हैं विदेशियों के प्रति यहां के लोगों के विचार बहुत संकुचित है विदेशियों के तौर-तरीके पहनावे के तरीके खान पान में नहीं पसंद थे इन्हीं कारण से उन्हें भी कहते थे भारत के लोग अपने अपने व्यवसाय को ही अपनाते थे सभी को भोजन अलग थाली में परोसा जाता एक थाल में नहीं खाते थे भारत में लोग दैनिक कार्य को करने में शगुन का महत्वपूर्ण मानते थे कुछ बातों की प्रशंसा भी की है जैसे हिंदुओं का ईश्वर के प्रति सम्मान और विश्वास है उनका मानना है कि ईश्वर एक है अनादि है अनंत है एवं स्वतंत्रता है सर्वशक्तिमान है सर्वज्ञ है सबसे बड़ा बुद्धिमान है एवं जीवित है जीवन दाता हैं शासक है एवं भारत खगोल विज्ञान व्यवस्था पांच सिद्धांत के रूप में दी गई हैं पृथ्वी और ग्रह उसका आकार एवं घूमना सूर्य और चंद्र ग्रहण अक्षांश एवं देशांतर इन के परीक्षण के उपकरण तथा अन्य गोलियों की भारतीय अवधारणा भारतीय गणितज्ञ खगोल शास्त्री योग्य है लेकिन उन्होंने इस ज्ञान को निष्कर्ष पर ध्यान नहीं दिया पृथ्वी तत्व अंतरिक्ष तथा समय और उसके विभाजन के पुराणों में वर्णित परंपरिक विचारों को ही मान्यता दी गई है इस कारण से भारत में वैज्ञानिको कारणों की ठेस पहुंचे ठेस पहुंची है दोस्तों आपको यह जानकर अच्छा लगेगा अलबरूनी ने यहां आकर संस्कृत सीखें मोहम्मद गौरी के बारे में मोहम्मद गौरी मोहम्मद गौरी अफगानिस्तान में और नामक जगह से आया था उसने सबसे पहले पंजाब में मुल्तान शहर पर आक्रमण किया और मुल्तान को हथियार या फिर राजस्थान के रेगिस्तान से होते हुए वह गुजरात की तरफ बढ़ा जहां छत्रिय वंश के राजा भीम ने उसे पराजित होना पड़ा मोहम्मद गौरी ने इस पराजय से हिम्मत नहीं हारी उसने सन 1190 ईस्वी तक पूरे पंजाब पर उसका अधिकार हो गया और वह भटिंडा से शासन चलाने लगा मोहम्मद गौरी

Thursday, 12 July 2018

अलबरूनी की दृष्टि में भारत

अलबरूनी की दृष्टि में भारत मध्य एशिया का प्रसिद्ध विद्वान अब रहन जिसे हम अलबरूनी के नाम से भी जानते हैं महमूद गजनवी के साथ भारत आया था उसने अपनी पुस्तक तहक़ीक़ ए हिंद में 11 वीं शताब्दी में भारत के सामाजिक एवं सांस्कृतिक जीवन से सामाजिक रीति रिवाज तौर-तरीके धर्म अंधविश्वास पर विस्तार से जानकारी दी है जिस के प्रमुख अंश निम्नलिखित हैं विदेशियों के प्रति यहां के लोगों के विचार बहुत संकुचित है विदेशियों के तौर-तरीके पहनावे के तरीके खान पान में नहीं पसंद थे इन्हीं कारण से उन्हें भी कहते थे भारत के लोग अपने अपने व्यवसाय को ही अपनाते थे सभी को भोजन अलग थाली में परोसा जाता एक थाल में नहीं खाते थे भारत में लोग दैनिक कार्य को करने में शगुन का महत्वपूर्ण मानते थे कुछ बातों की प्रशंसा भी की है जैसे हिंदुओं का ईश्वर के प्रति सम्मान और विश्वास है उनका मानना है कि ईश्वर एक है अनादि है अनंत है एवं स्वतंत्रता है सर्वशक्तिमान है सर्वज्ञ है सबसे बड़ा बुद्धिमान है एवं जीवित है जीवन दाता हैं शासक है एवं भारत खगोल विज्ञान व्यवस्था पांच सिद्धांत के रूप में दी गई हैं पृथ्वी और ग्रह उसका आकार एवं घूमना सूर्य और चंद्र ग्रहण अक्षांश एवं देशांतर इन के परीक्षण के उपकरण तथा अन्य गोलियों की भारतीय अवधारणा भारतीय गणितज्ञ खगोल शास्त्री योग्य है लेकिन उन्होंने इस ज्ञान को निष्कर्ष पर ध्यान नहीं दिया पृथ्वी तत्व अंतरिक्ष तथा समय और उसके विभाजन के पुराणों में वर्णित परंपरिक विचारों को ही मान्यता दी गई है इस कारण से भारत में वैज्ञानिको कारणों की ठेस पहुंचे ठेस पहुंची है दोस्तों आपको यह जानकर अच्छा लगेगा अलबरूनी ने यहां आकर संस्कृत सीखें मोहम्मद गौरी के बारे में मोहम्मद गौरी मोहम्मद गौरी अफगानिस्तान में और नामक जगह से आया था उसने सबसे पहले पंजाब में मुल्तान शहर पर आक्रमण किया और मुल्तान को हथियार या फिर राजस्थान के रेगिस्तान से होते हुए वह गुजरात की तरफ बढ़ा जहां छत्रिय वंश के राजा भीम ने उसे पराजित होना पड़ा मोहम्मद गौरी ने इस पराजय से हिम्मत नहीं हारी उसने सन 1190 ईस्वी तक पूरे पंजाब पर उसका अधिकार हो गया और वह भटिंडा से शासन चलाने लगा मोहम्मद गौरी

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