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तुर्क आक्रमण के समय भारत     Edit

 तुर्क आक्रमण के समय भारत में उत्तर भारत में इस्लाम के आगमन के समय कोई शक्तिशाली शासक नहीं था 11 वीं शताब्दी के प्रारंभ में भारत वर्ष वर्ष से भी अधिक छोटी राज्य नीतियों इकाइयों अथवा राज्यों में विभक्त हो चुका था जिन पर कई छोटे बड़े राजा और सामंत शासन करते थे इनमें अधिकांश राज्य पुत्र थे अतः इस युग को राजपूत युग भी कहा गया है इन छोटे-छोटे राज्यों के शासक व्यक्तिगत महत्वकांक्षा की मूर्ति हेतु राज्य विस्तार में संगठन हो गए इसके परिणाम स्वरुप राजनीतिक व्यवस्था और अधिक बढ़ गई ऐसे में केंद्रीय सत्ता का हास्य स्वाभाविक था समाजवादी पार्टी तथा भेदभाव के बंधन पर आधारित था इस समय जाति व्यवस्था में और अधिक कठोरता आ गई थी भारतीय समाज अपने खानपान एवं आचार विचार को श्रेष्ठ समझता था अतः दूसरे देशों में प्राया हो रहा उस से परिचित होने का प्रयास किया और ना ही उसका लाभ उठाया तथा तुर्क आक्रमण भारत में कई छोटे-छोटे बड़े राजा और सामान्य थे उत्तर भारत में चौहान तोमर गढ़वाल चंदेल चालुक्य जैसे राजपूत वंशों के राज्य थे इस समर्थकों ने जिनका राज्य ईरान अफगानिस्तान और तुर्किस्तान में था भारत में अपना राज्य फैलाने के लिए आक्रमण कर दिया सबसे पहले महमूद गजनवी का भारत पर आक्रमण लोगों द्वारा पहला बड़ा हमला तब हुआ जब गजनी राज्य अफगानिस्तान के महमूद गजनबी नामक एक राजा ने भारत पर पहला हमला किया हुआ भारत में राज्य नहीं करना चाहता था उसकी नजरें ईरान अफगानिस्तान व खुरासान के क्षेत्रों में ही दूसरे तुर्क राजाओं को हराकर अपना राज्य गजनी को बढ़ाने में लगी थी जब महमूद गजनवी भारत में राज्य नहीं करना चाहता था तो फिर वह भारत क्यों आया वह इसलिए आया कि वह अपनी सेना बनाने के लिए धन जुटाने की कोशिश कर रहा था इस कोशिश में उसने सन 1000 में से सन 1025 तक 17 बार विभिन्न राजपूत राजाओं पर आक्रमण किया उनसे कई राजाओं को हराकर उनके धन पर कब्जा किया उन मंदिरों पौधों को तोड़ा वालों का दिन में धन दौलत इकट्ठी होती थी पहले ज्यादातर धन-दौलत लोग मंदिरों में यादों में याद रखते थे 1025 ईस्वी में सोमनाथ मंदिर का आक्रमण सबसे प्रसिद्ध है जो शिवजी का मंदिर था अरुण

Thursday, 12 July 2018

तुर्क आक्रमण के समय भारत

 तुर्क आक्रमण के समय भारत में उत्तर भारत में इस्लाम के आगमन के समय कोई शक्तिशाली शासक नहीं था 11 वीं शताब्दी के प्रारंभ में भारत वर्ष वर्ष से भी अधिक छोटी राज्य नीतियों इकाइयों अथवा राज्यों में विभक्त हो चुका था जिन पर कई छोटे बड़े राजा और सामंत शासन करते थे इनमें अधिकांश राज्य पुत्र थे अतः इस युग को राजपूत युग भी कहा गया है इन छोटे-छोटे राज्यों के शासक व्यक्तिगत महत्वकांक्षा की मूर्ति हेतु राज्य विस्तार में संगठन हो गए इसके परिणाम स्वरुप राजनीतिक व्यवस्था और अधिक बढ़ गई ऐसे में केंद्रीय सत्ता का हास्य स्वाभाविक था समाजवादी पार्टी तथा भेदभाव के बंधन पर आधारित था इस समय जाति व्यवस्था में और अधिक कठोरता आ गई थी भारतीय समाज अपने खानपान एवं आचार विचार को श्रेष्ठ समझता था अतः दूसरे देशों में प्राया हो रहा उस से परिचित होने का प्रयास किया और ना ही उसका लाभ उठाया तथा तुर्क आक्रमण भारत में कई छोटे-छोटे बड़े राजा और सामान्य थे उत्तर भारत में चौहान तोमर गढ़वाल चंदेल चालुक्य जैसे राजपूत वंशों के राज्य थे इस समर्थकों ने जिनका राज्य ईरान अफगानिस्तान और तुर्किस्तान में था भारत में अपना राज्य फैलाने के लिए आक्रमण कर दिया सबसे पहले महमूद गजनवी का भारत पर आक्रमण लोगों द्वारा पहला बड़ा हमला तब हुआ जब गजनी राज्य अफगानिस्तान के महमूद गजनबी नामक एक राजा ने भारत पर पहला हमला किया हुआ भारत में राज्य नहीं करना चाहता था उसकी नजरें ईरान अफगानिस्तान व खुरासान के क्षेत्रों में ही दूसरे तुर्क राजाओं को हराकर अपना राज्य गजनी को बढ़ाने में लगी थी जब महमूद गजनवी भारत में राज्य नहीं करना चाहता था तो फिर वह भारत क्यों आया वह इसलिए आया कि वह अपनी सेना बनाने के लिए धन जुटाने की कोशिश कर रहा था इस कोशिश में उसने सन 1000 में से सन 1025 तक 17 बार विभिन्न राजपूत राजाओं पर आक्रमण किया उनसे कई राजाओं को हराकर उनके धन पर कब्जा किया उन मंदिरों पौधों को तोड़ा वालों का दिन में धन दौलत इकट्ठी होती थी पहले ज्यादातर धन-दौलत लोग मंदिरों में यादों में याद रखते थे 1025 ईस्वी में सोमनाथ मंदिर का आक्रमण सबसे प्रसिद्ध है जो शिवजी का मंदिर था अरुण

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