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Thursday, 12 July 2018

 प्रथम महिला शासक कौन थी रजिया सुल्तान इल्तुतमिश ने अपनी पुत्री रजिया को अपना उत्तराधिकारी बनाया था परंतु सरदारों तथा उलेमा के विरुद्ध विरोध के चलते इल्तुतमिश की मृत्यु के बाद उसका पुत्र रुक मुद्दीन फिरोज गद्दी पर बैठ गया लेकिन दुर्बल शासक होने के कारण 1236 जजिया दिल्ली की गद्दी पर बैठे और सुल्तान कहीं जाने लगी रजिया से पूर्व प्राचीन मिस्र और ईरान में महिलाओं ने की रानियों के रूप में शासन किया था परंतु मध्यकालीन विश्व की पहली मुस्लिम महिला सशक्ति रजिया सुल्तान रजिया ने लगभग 3 वर्ष 8 महीने शासन किया रजिया ने स्त्रियों का पहनावा छोड़ दिया और बिना पर्दे के दरबार में बैठने लगी युद्ध में सेना का नेतृत्व भी करती अमीरों को शीघ्र ही पता लग गया कि स्त्री होने पर भी रजिया उनके हाथों की कठपुतली बनाने को तैयार नहीं थी तुर्क सरदार भी किसी महिला के अधीन कार्य करने को तैयार नहीं थे उन्होंने एक षड्यंत्र के द्वारा उसे गद्दी से हटा दिया मेरा जिया के बाद उसका एक भाई एवं दो भतीजे बारी-बारी से सुल्तान बने जो अयोग्य थे अतः इल्तुतमिश के छोटे पुत्र नसीरुद्दीन महमूद को दिल्ली का सुल्तान बनाया गया दोस्तों सोचिए और बताइए उस समय लोगों का दरबारी अमीरों ने रजिया का विद्रोह किया क्यों किया होगा यदि रजिया आज शासक होती तो क्या असर होता नहीं होता एक दम नहीं होता क्योंकि आज के समय में आज के काल में महिलाएं भी उतनी ही शक्तिशाली हैं दोस्तों
 शासक कुतुबुद्दीन ऐबक सन 1206 ईस्वी में मोहम्मद गौरी की मृत्यु के पश्चात उसका तुर्क गुलाम कुतुबुद्दीन ऐबक उत्तर भारत का पहला तुर्क शासक था उसकी उदारता के कारण ही उसे लाख बख्श कहा जाता था अर्थात वह लाखों को दान करने वाला दाने प्रिय व्यक्ति था भारतवर्ष में उसके जीवन का अधिकांश समय सैनिक गतिविधियों में ही बीता कुतुबुद्दीन ऐबक को भवन निर्माण में भी रुचि थी उसने दिल्ली में क़ुतुब मीनार कुव्वत उल इस्लाम मस्जिद और अजमेर में डाई दिन का झोपड़ा का निर्माण कराया कुतुबमीनार की शुरुआत युवक ने की थी परंतु उसका उसको पूर्ण इल्तुतमिश ने कराया था कुतुबुद्दीन ऐबक ने भारत में एक नए राज्य की नींव अवश्य डाली पर उस पर राज्य को स्वादिष्ट बनाने का अवसर उसे नहीं मिल पाया इल्तुतमिश 1210 से 1236 ही राज्य कर पाया 1210 में कुतुबुद्दीन ऐबक की मृत्यु के पश्चात दिल्ली के अमीरों ने कुतुबुद्दीन इल्तुतमिश गद्दी पर बिठाया उससे ही उत्तरी भारत में तुर्कों के राज्य का वास्तविक संस्थापक माना जाता है गद्दी पर बैठने के बाद उसे आंतरिक और बाहरी समस्याओं से जूझना पड़ा इसने 26 वर्षों तक शासन किया शासन व्यवस्था उनकी उसकी देश में एक राजधानी एक स्वतंत्र राज्य प्रशासनिक व्यवस्था और अफसरशाही व्यवस्था की स्थापना की उसने दिल्ली को भारतवर्ष में तुर्क साम्राज्य राजनैतिक प्रशासनिक एवं सांस्कृतिक केंद्र बनाया उसने एकता अथवा ाइक्ता




 दोस्तों आज इस टॉपिक में हम भारत के सल्तनत काल की शुरुआत के बारे में कुछ चर्चा करेंगे दोस्तों जब मुहम्मद गौरी भारत के उत्तरी हिस्से पर अपना राज्य स्थापित कर चुका था उसने चौहान गढ़वाल सिंह चंदेल आदि कई वर्षों के राजाओं को हराकर अपना राज्य बनाया था खुद घर में रहता था और भारत में उसके राज्य के अलावा अलग-अलग प्रांतों में उसके अधिकारी शासन चलाते थे अधिकारी मोहम्मद गौरी के गुलाम थे क्योंकि मोहम्मद गौरी ने इन्हें खरीदा था एक गुलाम राज्य के अधिकारी थे तुम्हें इस बात से हैरानी होगी दोस्तों कि उन दिनों यह प्रथा थी कि तुर्किस्तान के युवकों को खरीद कर उन्हें युद्ध एवं प्रशासन के कामों में प्रशिक्षण देकर सुल्तान को बेचा जाता था इसलिए वे गुलाम कह जाते थे सुल्तान की सेवा में आने पर योग्य और होनहार गुलामों को उच्च और जिम्मेदारी के पद भी शॉप पर जाते थे और इसके बदले उन्हें ऊंचा वेतन मिलता था सुल्तान मोहम्मद गौरी की सेवा में भी ऐसे कई गुलाम थे और भारत में उनके राज्य शासन चलाते थे 1206 सब मोहम्मद गौरी की मृत्यु हुई तो उसका एक महत्वपूर्ण गुलाम अधिकारी कुतुबुद्दीन ऐबक था उसने गौरी के राज्य से अपना संबंध तोड़ दिया और भारत में ही तुर्क राज्य को मजबूत बनाया इस राज्य का सुल्तान कुतुबुद्दीन ऐबक खुद बना राज्य अब तुर्की सल्तनत काल आया अगले शासक इल्तुतमिश ने 1210 में सत्ता संभालने के लिए के साथ दिल्ली





अलबरूनी की दृष्टि में भारत मध्य एशिया का प्रसिद्ध विद्वान अब रहन जिसे हम अलबरूनी के नाम से भी जानते हैं महमूद गजनवी के साथ भारत आया था उसने अपनी पुस्तक तहक़ीक़ ए हिंद में 11 वीं शताब्दी में भारत के सामाजिक एवं सांस्कृतिक जीवन से सामाजिक रीति रिवाज तौर-तरीके धर्म अंधविश्वास पर विस्तार से जानकारी दी है जिस के प्रमुख अंश निम्नलिखित हैं विदेशियों के प्रति यहां के लोगों के विचार बहुत संकुचित है विदेशियों के तौर-तरीके पहनावे के तरीके खान पान में नहीं पसंद थे इन्हीं कारण से उन्हें भी कहते थे भारत के लोग अपने अपने व्यवसाय को ही अपनाते थे सभी को भोजन अलग थाली में परोसा जाता एक थाल में नहीं खाते थे भारत में लोग दैनिक कार्य को करने में शगुन का महत्वपूर्ण मानते थे कुछ बातों की प्रशंसा भी की है जैसे हिंदुओं का ईश्वर के प्रति सम्मान और विश्वास है उनका मानना है कि ईश्वर एक है अनादि है अनंत है एवं स्वतंत्रता है सर्वशक्तिमान है सर्वज्ञ है सबसे बड़ा बुद्धिमान है एवं जीवित है जीवन दाता हैं शासक है एवं भारत खगोल विज्ञान व्यवस्था पांच सिद्धांत के रूप में दी गई हैं पृथ्वी और ग्रह उसका आकार एवं घूमना सूर्य और चंद्र ग्रहण अक्षांश एवं देशांतर इन के परीक्षण के उपकरण तथा अन्य गोलियों की भारतीय अवधारणा भारतीय गणितज्ञ खगोल शास्त्री योग्य है लेकिन उन्होंने इस ज्ञान को निष्कर्ष पर ध्यान नहीं दिया पृथ्वी तत्व अंतरिक्ष तथा समय और उसके विभाजन के पुराणों में वर्णित परंपरिक विचारों को ही मान्यता दी गई है इस कारण से भारत में वैज्ञानिको कारणों की ठेस पहुंचे ठेस पहुंची है दोस्तों आपको यह जानकर अच्छा लगेगा अलबरूनी ने यहां आकर संस्कृत सीखें मोहम्मद गौरी के बारे में मोहम्मद गौरी मोहम्मद गौरी अफगानिस्तान में और नामक जगह से आया था उसने सबसे पहले पंजाब में मुल्तान शहर पर आक्रमण किया और मुल्तान को हथियार या फिर राजस्थान के रेगिस्तान से होते हुए वह गुजरात की तरफ बढ़ा जहां छत्रिय वंश के राजा भीम ने उसे पराजित होना पड़ा मोहम्मद गौरी ने इस पराजय से हिम्मत नहीं हारी उसने सन 1190 ईस्वी तक पूरे पंजाब पर उसका अधिकार हो गया और वह भटिंडा से शासन चलाने लगा मोहम्मद गौरी
 तुर्क आक्रमण के समय भारत में उत्तर भारत में इस्लाम के आगमन के समय कोई शक्तिशाली शासक नहीं था 11 वीं शताब्दी के प्रारंभ में भारत वर्ष वर्ष से भी अधिक छोटी राज्य नीतियों इकाइयों अथवा राज्यों में विभक्त हो चुका था जिन पर कई छोटे बड़े राजा और सामंत शासन करते थे इनमें अधिकांश राज्य पुत्र थे अतः इस युग को राजपूत युग भी कहा गया है इन छोटे-छोटे राज्यों के शासक व्यक्तिगत महत्वकांक्षा की मूर्ति हेतु राज्य विस्तार में संगठन हो गए इसके परिणाम स्वरुप राजनीतिक व्यवस्था और अधिक बढ़ गई ऐसे में केंद्रीय सत्ता का हास्य स्वाभाविक था समाजवादी पार्टी तथा भेदभाव के बंधन पर आधारित था इस समय जाति व्यवस्था में और अधिक कठोरता आ गई थी भारतीय समाज अपने खानपान एवं आचार विचार को श्रेष्ठ समझता था अतः दूसरे देशों में प्राया हो रहा उस से परिचित होने का प्रयास किया और ना ही उसका लाभ उठाया तथा तुर्क आक्रमण भारत में कई छोटे-छोटे बड़े राजा और सामान्य थे उत्तर भारत में चौहान तोमर गढ़वाल चंदेल चालुक्य जैसे राजपूत वंशों के राज्य थे इस समर्थकों ने जिनका राज्य ईरान अफगानिस्तान और तुर्किस्तान में था भारत में अपना राज्य फैलाने के लिए आक्रमण कर दिया सबसे पहले महमूद गजनवी का भारत पर आक्रमण लोगों द्वारा पहला बड़ा हमला तब हुआ जब गजनी राज्य अफगानिस्तान के महमूद गजनबी नामक एक राजा ने भारत पर पहला हमला किया हुआ भारत में राज्य नहीं करना चाहता था उसकी नजरें ईरान अफगानिस्तान व खुरासान के क्षेत्रों में ही दूसरे तुर्क राजाओं को हराकर अपना राज्य गजनी को बढ़ाने में लगी थी जब महमूद गजनवी भारत में राज्य नहीं करना चाहता था तो फिर वह भारत क्यों आया वह इसलिए आया कि वह अपनी सेना बनाने के लिए धन जुटाने की कोशिश कर रहा था इस कोशिश में उसने सन 1000 में से सन 1025 तक 17 बार विभिन्न राजपूत राजाओं पर आक्रमण किया उनसे कई राजाओं को हराकर उनके धन पर कब्जा किया उन मंदिरों पौधों को तोड़ा वालों का दिन में धन दौलत इकट्ठी होती थी पहले ज्यादातर धन-दौलत लोग मंदिरों में यादों में याद रखते थे 1025 ईस्वी में सोमनाथ मंदिर का आक्रमण सबसे प्रसिद्ध है जो शिवजी का मंदिर था अरुण
 धर्म भारत में इस्लाम धर्म समय-समय पर कई तरह से आया है वह फैला है जैसे अरब के व्यापारियों के माध्यम से मोहम्मद बिन कासिम द्वारा अपना राज्य स्थापित करने से ईरानी शरणार्थियों को सूफी संतों के आने से भारत में इस्लाम धर्म के प्रचार के कुछ प्रमुख कारण निम्नलिखित थे कई अरब व्यापारी जो इस्लाम धर्म को मानते थे भारत के पश्चिमी तट पर व्यापार व्यापार करने आते थे वहां के बंदरगाहों में वह छोटी-छोटी बस्तियां बनाकर बसते थे राजाओं ने उन्हें बसने की भी मदद कि उन्हें अपने घर गोदाम और मस्जिद बनाने के लिए जमीन दे दी इन व्यापारियों के प्रभाव से आसपास के कई लोग मुसलमान भी बने जब भारत के लोग लोगों ने इस्लाम धर्म अपनाया तब भी अपने कई पुराने रीति रिवाजों और रस्मों को बनाए रखा नंबर दो भारत के पश्चिम में इस्लाम धर्म एक घटना के कारण आया मोहम्मद बिन कासिम ने सिंध पर अपना राज्य स्थापित किया तो उसके साथ कई अरब लोग सिंह और मुल्तान में बसे उनके कारण वहां के लोग लोगों को इस नए धर्म के बारे में पता चला टॉपिक नंबर 3 भारत के उत्तरी हिस्सों में इस्लाम धर्म की जानकारी इरानी शरणार्थियों के द्वारा आई नसों में के लगभग इरान देश के पूर्व कबीले हमले कर रहे थे इन हमलों से बचने के लिए कई इरानी लोग भारत आए और उन्होंने भारत में अपना घर बना कर रहा उनमें कई लोग कारीगर थे और कई लोग संत थे कुछ सिपाही भी आए जो राय राजाओं की सेनाओं में शामिल हो गए यह लोग मुसलमान थे उनके संपर्क में आकर बहुत से लोगों को इस्लाम के बारे में जानकारी मिली नंबर 4 सन 1190 के बाद भारत में तुर्क लोगों ने अपना राज्य स्थापित कर लिया था इस समय तक तुर्क लोग भी इस्लाम धर्म मानने लगे थे तुर्कों के सामने बड़ी संख्या में इरानी अफगानी खुरासानी लोग भी भारत में आकर बसे 11:00 से 11:15 के बीच SS हुए जैसे कबीर नानक तुकाराम रामानंद जिन्होंने साधारण भाषा में दोहे गीत गाए जो ईश्वर के प्रति भक्ति भाव से भरे थे इन्हीं भक्तों की तरह कई मुसलमान संत भी थे जो सूफी संत कहलाते थे अजमेर के ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती पंजाब के बाबा फरीद दिल्ली के निजामुद्दीन ओलिया बहुत जाने-माने सूफी संत थे सूफी संतों के विचार भक्त संतों के विचार से मिलते-जुलते थे सूफियों ने इस बात पर जोर दिया कि सच्चे दिल से अल्लाह को प्रेम करना और अपने बुरे कामों पर पश्चाताप करना अल्लाह को पाक का सही रास्ता है इन संतो के विचारों की मदद से हिंदू और मुसलमान लोगों ने एक दूसरे के धर्म की समान बातें समझी लोगों के बीच यह विचार बैठने लगा कि एक ही ईश्वर है उसे अल्लाह ईश्वर परमेश्वर भगवान जैसे नामों से जाना जाता है
 नंबर 1 कलमा अल्लाह एक है और मोहम्मद साहब उनके पैगंबर हैं नंबर दो नमाज प्रतिदिन पांच बार नमाज पढ़ना रमजान रमजान के पवित्र महीने में रोजा यानी कि व्रत रखना जाकर नंबर 3 जाकर अपनी उपार्जित आय का 2.5 प्रतिशत गरीबों को सहायता देना और नंबर 5 हज पूरे जीवन में एक बार मक्का की तीर्थ यात्रा करना मोहम्मद साहब की विशेषताएं यहीं से आएं हैं जो इस्लाम धर्म को शुरूआत करते हैं इस्लाम धर्म एक धर्म है यह अरब देश की बात है कि वहां के मक्का नामक शहर में सन 750 में हजरत मोहम्मद का जन्म हुआ था उस समय अरब के छोटे-छोटे कबीले थे जो लगातार एक-दूसरे से लड़ते रहते थे यह लोग बहुत सारे देवी देवताओं की पूजा करते थे हजरत मोहम्मद इन कमीनों के बीच आपसी सौदा एवं भाईचारा बढ़ाने के लिए संदेश लेने लगे कि ईश्वर एक है एक अल्लाह एकमात्र अल्लाह है सीधा और सरल तरीके से प्रार्थना करनी चाहिए मोहम्मद साहब ने कहा कि अल्लाह को मानने वाले लोग बराबर हैं और एक हैं शुरू में मक्का शहर के कई लोग ने मोहम्मद साहब की बातों का विरोध भी किया यहां तक कि मोहम्मद साहब को मक्का छोड़कर 622 ईस्वी में दूसरे शहर मदीना जाना पड़ा इनका यह जाना हिजरत कहा जाता है इसी समय से मुसलमानों को हिजरी संवत प्रारंभ होता है धीरे-धीरे अरब के सारे कबीले मोहम्मद साहब की बातें मानने लगे इस्लाम धर्म अरब देश से शुरू होकर दुनिया के कई देशों में बहुत से लोगों ने इस्लाम धर्म को अपनाया
 दोस्तों इस्लाम धर्म को मानने वाले लोग दिन में 5 बार अल्लाह यानी ईश्वर की प्रार्थना करते हैं तथा इसे नमाज पढ़ना भी कहते हैं अपने ध्यान दिया होगा की मस्जिद में किसी देवी देवता की मूर्ति नहीं होती बड़ा आंगन होता है जिसमें सभी इकट्ठा होकर घर कब आने की पश्चिम की ओर मुंह करके नमाज पढ़ते हैं पश्चिम की तरफ जिस ओर मुंह करके नमाज पढ़ी जाती है एक दीवार होती है इस्लाम के 3 बुनियादी सिद्धांत है समता समानता तथा बंधुत्व दोस्तों इस्लाम धर्म के लोग मानते हैं अल्लाह एक है और वह उनके बंदे हैं तथा हजरत मोहम्मद अल्लाह का पैगाम संदेश लाने वाले पैगंबर हजरत मोहम्मद ने जब अल्लाह का पैगाम लोगों को बताना शुरू किया तब इस्लाम धर्म की शुरुआत हुई दोस्तों मोहब्बत साहब की कुछ विशेषताएं जैसे नंबर 1 कोलंबा कोलंबा अल्लाह

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