शासक कुतुबुद्दीन ऐबक सन 1206 ईस्वी में मोहम्मद गौरी की मृत्यु के पश्चात उसका तुर्क गुलाम कुतुबुद्दीन ऐबक उत्तर भारत का पहला तुर्क शासक था उसकी उदारता के कारण ही उसे लाख बख्श कहा जाता था अर्थात वह लाखों को दान करने वाला दाने प्रिय व्यक्ति था भारतवर्ष में उसके जीवन का अधिकांश समय सैनिक गतिविधियों में ही बीता कुतुबुद्दीन ऐबक को भवन निर्माण में भी रुचि थी उसने दिल्ली में क़ुतुब मीनार कुव्वत उल इस्लाम मस्जिद और अजमेर में डाई दिन का झोपड़ा का निर्माण कराया कुतुबमीनार की शुरुआत युवक ने की थी परंतु उसका उसको पूर्ण इल्तुतमिश ने कराया था कुतुबुद्दीन ऐबक ने भारत में एक नए राज्य की नींव अवश्य डाली पर उस पर राज्य को स्वादिष्ट बनाने का अवसर उसे नहीं मिल पाया इल्तुतमिश 1210 से 1236 ही राज्य कर पाया 1210 में कुतुबुद्दीन ऐबक की मृत्यु के पश्चात दिल्ली के अमीरों ने कुतुबुद्दीन इल्तुतमिश गद्दी पर बिठाया उससे ही उत्तरी भारत में तुर्कों के राज्य का वास्तविक संस्थापक माना जाता है गद्दी पर बैठने के बाद उसे आंतरिक और बाहरी समस्याओं से जूझना पड़ा इसने 26 वर्षों तक शासन किया शासन व्यवस्था उनकी उसकी देश में एक राजधानी एक स्वतंत्र राज्य प्रशासनिक व्यवस्था और अफसरशाही व्यवस्था की स्थापना की उसने दिल्ली को भारतवर्ष में तुर्क साम्राज्य राजनैतिक प्रशासनिक एवं सांस्कृतिक केंद्र बनाया उसने एकता अथवा ाइक्ता
प्रारंभिक तुर्क शासक गुलाम 1206 ईस्वी से 1290 ईस्वी तक Edit
शासक कुतुबुद्दीन ऐबक सन 1206 ईस्वी में मोहम्मद गौरी की मृत्यु के पश्चात उसका तुर्क गुलाम कुतुबुद्दीन ऐबक उत्तर भारत का पहला तुर्क शासक था उसकी उदारता के कारण ही उसे लाख बख्श कहा जाता था अर्थात वह लाखों को दान करने वाला दाने प्रिय व्यक्ति था भारतवर्ष में उसके जीवन का अधिकांश समय सैनिक गतिविधियों में ही बीता कुतुबुद्दीन ऐबक को भवन निर्माण में भी रुचि थी उसने दिल्ली में क़ुतुब मीनार कुव्वत उल इस्लाम मस्जिद और अजमेर में डाई दिन का झोपड़ा का निर्माण कराया कुतुबमीनार की शुरुआत युवक ने की थी परंतु उसका उसको पूर्ण इल्तुतमिश ने कराया था कुतुबुद्दीन ऐबक ने भारत में एक नए राज्य की नींव अवश्य डाली पर उस पर राज्य को स्वादिष्ट बनाने का अवसर उसे नहीं मिल पाया इल्तुतमिश 1210 से 1236 ही राज्य कर पाया 1210 में कुतुबुद्दीन ऐबक की मृत्यु के पश्चात दिल्ली के अमीरों ने कुतुबुद्दीन इल्तुतमिश गद्दी पर बिठाया उससे ही उत्तरी भारत में तुर्कों के राज्य का वास्तविक संस्थापक माना जाता है गद्दी पर बैठने के बाद उसे आंतरिक और बाहरी समस्याओं से जूझना पड़ा इसने 26 वर्षों तक शासन किया शासन व्यवस्था उनकी उसकी देश में एक राजधानी एक स्वतंत्र राज्य प्रशासनिक व्यवस्था और अफसरशाही व्यवस्था की स्थापना की उसने दिल्ली को भारतवर्ष में तुर्क साम्राज्य राजनैतिक प्रशासनिक एवं सांस्कृतिक केंद्र बनाया उसने एकता अथवा ाइक्ता



